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1हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता असफल रही, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या एक बार फिर दोनों देशों के बीच जंग भड़क सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दशकों की दुश्मनी को 21 घंटे की बातचीत में सुलझाना संभव नहीं था।
इस वार्ता के विफल होने के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, अमेरिका और ईरान दोनों के बीच आपसी विश्वास की कमी है। जब वार्ता शुरू हुई, तो दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी शर्तें रखीं, जो आपस में मेल नहीं खा रही थीं।
अमेरिका ने ईरान से यह अपेक्षा की थी कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा, लेकिन ईरान ने इस पर सहमति नहीं दी। ईरान के प्रतिनिधियों का कहना था कि अमेरिका को पहले अपने प्रतिबंधों को हटाना होगा।
वहीं, ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह बातचीत में बार-बार अपनी शर्तें बदल रहा है। इस स्थिति ने वार्ता को जटिल बना दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता एक नई वार्ता की पहल है। हालांकि, इसके लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने रुख में नरमी लानी होगी।
इस्लामाबाद वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने अपने मध्यस्थता के प्रयास किए, लेकिन परिणाम शून्य रहा। अब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान से यह मांग कर रहा है कि वे फिर से बातचीत की पहल करें।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। यदि दोनों देश समय रहते अपने मतभेदों को सुलझाने में असफल रहते हैं, तो इससे व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है.
वार्ता असफल रही, जिससे दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास में कमी आई.
पाकिस्तान ने मध्यस्थता के प्रयास किए, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही.