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1पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर, पूरे देश में शोक की लहर है। इस हमले ने न केवल पीड़ितों के परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं, बल्कि पूरे देश को भी प्रभावित किया है। इस मौके पर हम सभी को मिलकर शहीदों की याद में एक मोमबत्ती जलानी चाहिए।
एक साल बीत जाने के बाद भी मोदी सरकार ने इस हमले के संदर्भ में सुरक्षा में हुई चूक पर कोई स्पष्टता नहीं दी है। यह सवाल उठता है कि क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हम ऐसे हमलों से बच नहीं पा रहे हैं।
इस हमले के बाद, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों ने भी पाकिस्तान के खिलाफ सख्त बयान दिए हैं। इससे यह साफ होता है कि भारत अकेला नहीं है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा है।
हालांकि, इस हमले के बाद भी पहलगाम में सैलानियों की संख्या में कमी नहीं आई है। पिछले एक साल में लगभग 10 लाख पर्यटक पहलगाम आए हैं, जो इस क्षेत्र की खूबसूरती और शांति को दर्शाता है।
हम सभी को इस मौके पर शहीदों की याद में मोमबत्ती जलाने का संकल्प लेना चाहिए। यह ना केवल हमारी एकता का प्रतीक है, बल्कि पीड़ित परिवारों के प्रति हमारी संवेदना भी व्यक्त करता है।
पहलगाम हमले की बरसी पर, हमें एकजुट होकर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम ऐसे हमलों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शहीदों के परिवारों के प्रति सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता है।
पहलगाम हमला 2022 में हुआ था।
सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई स्पष्टता नहीं दी है।
हाल के सालों में पहलगाम में सैलानियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लगभग 10 लाख पर्यटक आए हैं।