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1हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने बाजार की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। केवल 16 दिनों में, इन निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जो हर घंटे औसतन 1000 करोड़ रुपये के बराबर है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गई है।
विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और उच्च ब्याज दरें निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। इसके अलावा, भारतीय बाजार में कैपिटल गेन टैक्स की उच्च दरें भी विदेशी निवेशकों के लौटने में बाधा डाल रही हैं।
16 दिन में 1 लाख करोड़ रुपये की निकासी, पिछले 10 वर्षों में सबसे कम स्तर पर विदेशी निवेश को दर्शाती है। यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो इससे बाजार में और गिरावट आ सकती है।
सरकार ने इस स्थिति पर ध्यान दिया है और कई उपायों पर विचार कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टैक्स में कमी से ही विदेशी निवेशकों का विश्वास नहीं लौटेगा। उन्हें अन्य आर्थिक सुधारों की भी आवश्यकता है।
यदि निवेशकों का यह रुख जारी रहा, तो भारतीय बाजार में स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार और बाजार नियामक इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में अस्थिरता और निवेशकों के विश्वास में कमी आ सकती है।
जी हां, सरकार विभिन्न उपायों पर विचार कर रही है, लेकिन केवल टैक्स में कमी से समस्या का समाधान नहीं होगा।
यदि सरकार ठोस सुधार लागू करती है, तो विदेशी निवेशकों का लौटना संभव है।